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अम्ल और क्षार (Acids & Bases) - for SSC & RRB Complete notes

🧪 अम्ल और क्षार (Acids & Bases) - Complete notes for SSC & RRB अम्ल और क्षार (Acids & Bases) - Complete notes for SSC & RRB 🍋 अम्ल (Acids) - परिभाषा और पहचान अम्ल की परिभाषा: 1) आर्हेनियस के अनुसार (Arrhenius Theory): वे पदार्थ जो जल में घुलकर हाइड्रोजन आयन (H⁺) देते हैं, अम्ल कहलाते हैं। HCl → H⁺ + Cl⁻ H₂SO₄ → 2H⁺ + SO₄²⁻ 2) ब्रॉन्स्टेड-लॉरी के अनुसार (Bronsted-Lowry Theory): वे पदार्थ जो प्रोटॉन (H⁺) दान करते हैं, अम्ल कहलाते हैं। 3) लुईस के अनुसार (Lewis Theory): वे पदार्थ जो इलेक्ट्रॉन युग्म ग्रहण करते हैं। ✅ अम्ल की पहचान के गुण: गुण विवरण स्वाद खट्टा (Sour) लिटमस परीक्षण नीला लिटमस → लाल स्पर्श संक्षारक (Corrosive) विद्युत चालकता जलीय विलयन विद्युत का चालन करता है धातुओं से क्रिया H₂ गैस मुक्त करते हैं क्षार से क्रिया लवण + जल बनाते हैं (उदासीनीकरण) 📚 अम्लों के प्रकार A) उत्पत्ति के आधार पर: 1️⃣ प्राकृतिक/कार्बनिक अम्ल (Organic Acids): अम्ल रासायनिक सूत्र स्रोत विशेषता एसीटिक अम्ल CH₃COOH सिरका (Vinegar) 5-8% सांद्रता साइट्रिक अम्ल C₆H...

CDM and Simon Commission – सविनय अवज्ञा आंदोलन और साइमन कमीशन



🟢 साइमन कमीशन (Simon Commission, 1927 – 1930)

पृष्ठभूमि

  • 1919 का मॉन्टेग्यू-चेम्सफोर्ड सुधार (Government of India Act, 1919) में प्रावधान था कि 10 साल बाद सुधारों की समीक्षा हेतु एक आयोग गठित होगा।
  • लेकिन ब्रिटिश सरकार ने 1927 में ही आयोग गठित कर दिया (यानी 2 साल पहले)।

गठन

  • अध्यक्ष: सर जॉन साइमन
  • कुल सदस्य: 7 → सभी ब्रिटिश, कोई भी भारतीय सदस्य नहीं
  • उद्देश्य: 1919 के सुधारों की समीक्षा करना और आगे के लिए सुझाव देना।

प्रतिक्रिया

  • पूरे भारत में इसका भारी विरोध हुआ।
  • नारा: “Simon Go Back”
  • लाला लाजपत राय ने लाहौर में विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व किया।
    • उन पर पुलिस लाठीचार्ज हुआ (जेम्स स्कॉट के आदेश पर) और बाद में उनकी मृत्यु हो गई।
  • कांग्रेस, मुस्लिम लीग (जिन्ना गुट को छोड़कर), हिन्दू महासभा, और अन्य सभी दलों ने विरोध किया।

परिणाम

  • कमीशन ने 1930 में अपनी रिपोर्ट सौंपी।
  • रिपोर्ट के आधार पर 1930–32 के बीच तीन गोलमेज सम्मेलन (Round Table Conferences) आयोजित हुए।
  • अंततः इससे 1935 का भारत सरकार अधिनियम (Government of India Act, 1935) बना।

🟢 सविनय अवज्ञा आंदोलन (Civil Disobedience Movement, 1930 – 1934)

पृष्ठभूमि

  • 1927 में साइमन कमीशन का विरोध हुआ।
  • 1928 में नेहरू रिपोर्ट आई → डोमिनियन स्टेटस की माँग।
  • दिसंबर 1929 में लाहौर कांग्रेस अधिवेशन (अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू) → कांग्रेस ने "पूर्ण स्वराज्य" का लक्ष्य तय किया।
  • 26 जनवरी 1930 को पहला स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।

शुरुआत

  • 1930 में कांग्रेस ने आंदोलन की जिम्मेदारी गांधीजी को दी।
  • गांधीजी ने 11 मांगों की सूची सरकार को भेजी (नमक कर, विदेशी वस्त्र, शराबबंदी, आदि)।
  • सरकार ने इनकार किया → गांधी ने आंदोलन की घोषणा की।

दांडी मार्च (12 मार्च – 6 अप्रैल, 1930)

  • गांधीजी ने 78 अनुयायियों के साथ साबरमती आश्रम से दांडी तक 240 मील (385 किमी) की पदयात्रा की।
  • 6 अप्रैल 1930 को दांडी पहुँचकर नमक कानून तोड़ा
  • यह प्रतीक था कि भारतवासी अब अंग्रेजी कानून का पालन नहीं करेंगे।

आंदोलन का स्वरूप

  • नमक कर का उल्लंघन।
  • जंगल कानून तोड़ना।
  • करों का बहिष्कार।
  • विदेशी वस्त्रों और सामान का बहिष्कार।
  • जनता का बड़े पैमाने पर भागीदारी।

सरकार की प्रतिक्रिया

  • लगभग 90,000 लोग गिरफ्तार किए गए।
  • गांधी, नेहरू, पटेल आदि नेता जेल गए।

गांधी-इरविन समझौता (मार्च 1931)

  • गांधीजी और वायसराय लॉर्ड इरविन के बीच समझौता हुआ।
  • शर्तें:
    • कांग्रेस आंदोलन बंद करेगी।
    • राजनीतिक कैदियों को रिहा किया जाएगा।
    • गांधीजी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (लंदन, 1931) में भाग लेंगे।

द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (सितम्बर–दिसम्बर 1931)

  • गांधीजी ने "कांग्रेस और भारतीय जनता के प्रतिनिधि" के रूप में भाग लिया।
  • असफल रहा → मुख्य विवाद "अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व" और "साम्प्रदायिक पुरस्कार" पर था।

आंदोलन की पुनः शुरुआत

  • 1932 में गांधीजी गिरफ्तार हुए।
  • यरवदा जेल में गांधीजी ने डॉ. भीमराव अंबेडकर से पूना समझौता (1932) किया।
    • इसमें दलितों के लिए आरक्षित सीटों पर सहमति बनी।

आंदोलन का अंत

  • 1934 में कांग्रेस ने आंदोलन वापस ले लिया।
  • आंदोलन सफल न होते हुए भी इसने अंग्रेजों को जन-शक्ति का वास्तविक अंदाज़ा करा दिया।

🟢 CDM और Simon Commission का संबंध

  • Simon Commission (1927) के विरोध ने कांग्रेस को एकजुट किया और पूर्ण स्वराज्य की दिशा दी।
  • उसी से प्रेरित होकर कांग्रेस ने 1930 में Civil Disobedience Movement शुरू किया।
  • यानी Simon Commission → Nehru Report → Purna Swaraj (1929) → Civil Disobedience Movement (1930)।

🟢 निष्कर्ष

👉 साइमन कमीशन भारतीयों को राजनीतिक सुधारों से बाहर रखने की अंग्रेजों की मानसिकता का प्रतीक था।
👉 सविनय अवज्ञा आंदोलन ने जनता को पहली बार बड़े पैमाने पर कानून तोड़ने के माध्यम से स्वतंत्रता संग्राम से जोड़ा।
👉 इन दोनों घटनाओं ने मिलकर भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन को निर्णायक मोड़ दिया।




TABLE FORM


Simon Commission & Civil Disobedience Movement – Table Format

वर्ष / घटना मुख्य विशेषताएँ परिणाम / प्रभाव
1927 – साइमन कमीशन का गठन - अध्यक्ष: सर जॉन साइमन
- कुल 7 सदस्य, सभी ब्रिटिश, कोई भारतीय नहीं
- पूरे भारत में विरोध
- नारा: “Simon Go Back”
1928 – विरोध और लाठीचार्ज - लाला लाजपत राय ने लाहौर में विरोध का नेतृत्व किया
- पुलिस लाठीचार्ज में गंभीर घायल → मृत्यु
- भारत में जनाक्रोश और तेज हुआ
- जवाहरलाल नेहरू, सुभाष चंद्र बोस जैसे नेता उभरे
1928 – नेहरू रिपोर्ट - साइमन कमीशन के जवाब में भारतीय नेताओं ने अपनी रिपोर्ट तैयार की
- अध्यक्ष: मोटीलाल नेहरू
- डोमिनियन स्टेटस की मांग रखी गई
1929 – लाहौर अधिवेशन - अध्यक्ष: जवाहरलाल नेहरू
- "पूर्ण स्वराज्य" की घोषणा
- 26 जनवरी 1930: पहला स्वतंत्रता दिवस
- आंदोलन की दिशा तय हुई
1930 – सविनय अवज्ञा आंदोलन (CDM) की शुरुआत - गांधीजी ने 11 मांगें रखीं
- 12 मार्च: दांडी मार्च (240 मील)
- नमक कानून तोड़ा
- जनभागीदारी अभूतपूर्व
- हजारों गिरफ्तार
1931 – गांधी-इरविन समझौता - कांग्रेस आंदोलन बंद करेगी
- राजनीतिक कैदी छोड़े जाएंगे
- गांधी द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में शामिल होंगे
- आंदोलन कुछ समय के लिए रुका
1931 – द्वितीय गोलमेज सम्मेलन - गांधी ने भारतीय जनता का प्रतिनिधित्व किया
- मुख्य विवाद: अल्पसंख्यक प्रतिनिधित्व
- सम्मेलन विफल
1932 – पुनः आंदोलन और पूना समझौता - गांधी गिरफ्तार
- अंबेडकर–गांधी के बीच पूना समझौता (दलित आरक्षण पर सहमति)
- आंदोलन कमजोर पड़ा
1934 – CDM का अंत - कांग्रेस ने आंदोलन वापस लिया - अंग्रेजों को भारत की जनशक्ति का एहसास हुआ
- आगे के संघर्ष का मार्ग प्रशस्त




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